कुरान - 18:66 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
قَالَ لَهُۥ مُوسَىٰ هَلۡ أَتَّبِعُكَ عَلَىٰٓ أَن تُعَلِّمَنِ مِمَّا عُلِّمۡتَ رُشۡدٗا

Transliteration: (Qaala lahoo Moosaa hal attabi'uka 'alaaa an tu'allimani mimmaa 'ullimta rushdaa)

मूसा ने उनसे कहा, 'क्या मैं आपके साथ रह सकता हूँ इस शर्त पर कि आप मुझे उस हिदायत व भलाई के इल्म में से सिखाएं जो आपको सिखाया गया है?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 66

✅ तालिब-ए-इल्म का अदब: हज़रत मूसा की आजिज़ी

उलुल अज़्म पैग़म्बर होने के बावजूद हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने इन्तेहाई आजिज़ी और अदब के साथ हज़रत ख़िज़्र से शागिर्दी की दरख़्वास्त की कि जो हिकमत व रुश्द का इल्म अल्लाह ने आपको बख़्शा है, क्या मैं आपके साथ रहकर उसमें से कुछ सीख सकता हूँ? यह तालिबे इल्म के लिए उस्ताद के अदब की बेहतरीन मिसाल है।

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