कुरान - 18:68 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
وَكَيۡفَ تَصۡبِرُ عَلَىٰ مَا لَمۡ تُحِطۡ بِهِۦ خُبۡرٗا

Transliteration: (Wa kaifa tasbiru 'alaa maa lam tuhit bihee khubraa)

'और आप उस बात पर सब्र कर भी कैसे सकते हैं जिसकी हक़ीक़त का आपको पूरा इल्म न हो?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 68

✅ इल्म की महदूदियत और सब्र का ताल्लुक़

हज़रत ख़िज़्र ने माकूल बात कही कि जिस वाक़िए के पीछे छिपी हुई हिकमत और अंजाम का इंसान को इल्म न हो, उस पर ज़ाहिरी तौर पर चुप रहना और सब्र करना किसी भी इंसान के लिए मुमकिन नहीं होता।

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