कुरान - 18:63 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
قَالَ أَرَءَيۡتَ إِذۡ أَوَيۡنَآ إِلَى ٱلصَّخۡرَةِ فَإِنِّي نَسِيتُ ٱلۡحُوتَ وَمَآ أَنسَىٰنِيهُ إِلَّا ٱلشَّيۡطَٰنُ أَنۡ أَذۡكُرَهُۥۚ وَٱتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِي ٱلۡبَحۡرِ عَجَبٗا

Transliteration: (Qaala ara'ayta iz awainaaa ilas sakhrati fa innee naseetul hoota wa maaa ansaaneehu illash Shaitaanu an azkurah; wattakhaza sabeelahoo fil bahri'ajabaa)

उसने कहा, 'ज़रा देखिए तो, जब हमने उस चट्टान के पास पनाह ली थी, तो मैं मछली (की बात) भूल गया; और शैतान ही ने मुझे उसे याद रखने से ग़ाफ़िल कर दिया; और उसने तो समन्दर में अजीब तरीक़े से अपना रास्ता बना लिया था!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 63

✅ चट्टान पर मछली का वाक़िआ और शैतानी ग़फ़लत

हज़रत यूशा बिन नून ने याद आने पर अर्ज़ किया कि जब हम उस चट्टान के पास सुस्ता रहे थे, तभी मछली ज़िन्दा होकर समन्दर में चली गई थी। शैतान ने मुझे ऐसा ग़ाफ़िल किया कि मैं उस वक़्त आपको बताना भूल गया। समन्दर के पानी का उसके लिए सुरंग बन जाना वाक़ई एक हैरतअंगेज़ करिश्मा था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now