कुरान - 18:77 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَيَآ أَهۡلَ قَرۡيَةٍ ٱسۡتَطۡعَمَآ أَهۡلَهَا فَأَبَوۡاْ أَن يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا فِيهَا جِدَارٗا يُرِيدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقَامَهُۥۖ قَالَ لَوۡ شِئۡتَ لَتَّخَذۡتَ عَلَيۡهِ أَجۡرٗا

Transliteration: (Fantalaqaa hattaaa izaaa atayaaa ahla qaryatinis tat'amaaa ahlahaa fa abaw any yudaiyifoohumaa fawajadaa feehaa jidaarany yureedu any yanqadda fa aqaamah; qaala law shi'ta lattakhazta 'alaihi ajraa)

फिर दोनों आगे बढ़े; यहाँ तक कि जब वे एक बस्ती वालों के पास पहुंचे, तो उन्होंने वहाँ के बाशिंदों से खाना मांगा, मगर उन्होंने उनकी मेहमानी करने से इनकार कर दिया; फिर उन दोनों ने वहाँ एक दीवार पाई जो गिरने ही वाली थी, तो उन्होंने (ख़िज़्र ने) उसे सीधा खड़ा कर दिया। मूसा ने कहा, 'अगर आप चाहते तो इस पर कुछ उजरत (मज़दूरी) ले लेते।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 77

✅ तीसरा वाक़िआ: बद-अख़लाक़ बस्ती में गिरती दीवार की मरम्मत

दोनों एक ऐसी बस्ती में पहुंचे जहाँ के लोग इन्तेहाई बखील और बद-अख़लाक़ थे, उन्होंने मुसाफ़िरों को एक लुक़्मा खाना तक न दिया। इसके बावजूद हज़रत ख़िज़्र ने उस बस्ती की एक गिरती हुई दीवार को अपने हाथों से दुरुस्त कर दिया। हज़रत मूसा ने फ़रमाया कि जिन्होंने मेहमानी से इनकार किया, उनके लिए मुफ़्त में इतनी मेहनत क्यों? हम मज़दूरी लेकर खाने का इंतज़ाम तो कर सकते थे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now