कुरान - 18:79 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
أَمَّا ٱلسَّفِينَةُ فَكَانَتۡ لِمَسَٰكِينَ يَعۡمَلُونَ فِي ٱلۡبَحۡرِ فَأَرَدتُّ أَنۡ أَعِيبَهَا وَكَانَ وَرَآءَهُم مَّلِكٞ يَأۡخُذُ كُلَّ سَفِينَةٍ غَصۡبٗا

Transliteration: (Ammas safeenatu fakaanat limasaakeena ya'maloona fil bahri fa arattu an a'eebahaa wa kaana waraaa' ahum malikuny yaakhuzu kulla safeenatin ghasbaa)

'कश्ती का मुआमला यह था कि वह चन्द मिस्कीनों (ग़रीबों) की थी जो समन्दर में मेहनत-मज़दूरी करते थे; तो मैंने चाहा कि उसे ऐबदार कर दूँ, क्योंकि उनके आगे (रास्ते में) एक ऐसा बादशाह था जो हर (साबुत) कश्ती को ज़बरदस्ती छीन रहा था।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 79

✅ पहली हिकमत: कश्ती वालों की रोज़ी की हिफ़ाज़त

कश्ती ग़रीब मज़दूरों की थी जिनकी रोज़ी उसी पर मुन्हसिर थी। आगे एक ज़ालिम बादशाह अच्छी और बे-ऐब कश्तियों को ज़बरदस्ती ज़ब्त कर रहा था। हज़रत ख़िज़्र ने एक तख़्ता उधेड़कर उसे ऐबदार बना दिया ताकि ज़ालिम बादशाह उसे छोड़कर आगे निकल जाए और बाद में वे तख़्ता जोड़कर अपनी रोज़ी चलाते रहें।

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