Transliteration: (Inna 'alainaa lal hudaa)
राह दिखाने की ज़िम्मेदारी (Responsibility of Guidance):
यह आयत बताती है कि इंसानों को सही रास्ता दिखाना अल्लाह का काम है। लेकिन अल्लाह किसी को मजबूर नहीं करते कि वह नेक बने, क्योंकि इंसानों को आज़ादी दी गई है। अगर इंसान फ़रिश्तों की तरह मजबूर होते, तो उन्हें नेकियों का इनाम या बुराइयों की सज़ा देने का सवाल ही नहीं होता।
कुदरती निशानियों से राह दिखाना (Guidance Through Natural Signs):
अल्लाह ने इंसानों को आंखें, कान, नाक और ज़ुबान जैसी नेमतें दी हैं, ताकि वे दुनियावी अच्छाई और बुराई में फर्क कर सकें। ये नेमतें इंसानों को मीठा-खट्टा, गर्म-ठंडा जैसी चीज़ों का एहसास कराती हैं और सही फैसले लेने में मदद करती हैं।
कुदरती निज़ाम से रहनुमाई (Guidance Through Natural Systems):
अल्लाह ने इंसानों को सूरज की रौशनी, मौसम और पुराने इल्म जैसे कि यूनानी तिब्ब (Greek Medicine) जैसी चीज़ें दी हैं। ये निज़ाम इंसानों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनकी मदद करते हैं।
रूहानी रहनुमाई (Spiritual Guidance):
रूहानी रास्ते पर चलाने के लिए, अल्लाह ने इंसानों को समझदार दिमाग (sound minds), नबियों, वलियों, और आलिमों (Islamic scholars) का तोहफा दिया है। ये लोग अच्छाई और बुराई के फर्क को समझने और सही रास्ते पर चलने में इंसानों की मदद करते हैं।
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