कुरान - 92:13 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَإِنَّ لَنَا لَلۡأٓخِرَةَ وَٱلۡأُولَىٰ

Transliteration: (Wa inna lanaa lal Aakhirata wal oolaa )

13.और निसंदेह, आखिरत (परलोक) और यह दुनियावी जीवन [11] हमारे ही अधीन है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

और बेशक हमारे पास परलोक (आख़िरत) और यह दुनिया दोनों हैं
(And Verily to Us Belongs the Hereafter (Aakhirat) and the Present Life)

तफसीर (Explanation):

यह दुनिया और परलोक (आख़िरत) अल्लाह के हैं (The World and Hereafter (Aakhirat) Belong to Allah):

यह आयत इस बात को जाहिर करती है कि दुनिया और परलोक (आख़िरत) दोनों ही अल्लाह के हैं। अल्लाह दोनों जहां में हुकूमत रखते हैं, और उनकी इच्छा से ही सबका नसीब तय होता है। यह मार्गदर्शन ईमान वालों को अल्लाह के हुक्म के अनुसार दुनिया और परलोक (आख़िरत) दोनों में भलाई की तलाश करने की प्रेरणा देता है।

दुनिया और परलोक (आख़िरत) दोनों की तलाश (Seeking Both the World and the Hereafter (Aakhirat)):

कुछ लोग केवल दुनिया की तलाश करते हैं, परलोक (आख़िरत) को नज़रअंदाज़ करते हैं, जबकि कुछ लोग सिर्फ परलोक (आख़िरत) को ध्यान में रखते हैं और दुनियावी कामों को छोड़ देते हैं। सबसे बेहतर वे हैं जो दोनों की तलाश करते हैं, ताकि दोनों ही जगहों में तरक्की हो। जो लोग केवल दुनिया की तलाश में रहते हैं, उन्हें दुखी माना जाता है, जबकि जो दोनों जहां की तलाश करते हैं, वे धार्मिक और संतुलित होते हैं।

दोनों जहां की राह दिखाने में अल्लाह की रहनुमाई (Divine Guidance in Seeking Both Worlds):

नबियों और वलियों से दुनियावी और रूहानी दोनों मामलों में मार्गदर्शन लेना न तो गलत है, न ही यह अल्लाह के हुक्म से बाहर है। जैसे कोई इंसान अपने दुनियावी रोग के लिए डॉक्टर से इलाज करवाता है, वैसे ही दोनों जहां में मदद लेने के लिए ईमानदार लोगों से मदद लेना अल्लाह के प्लान का हिस्सा है।

परलोक (आख़िरत) की अहमियत (The Superiority of the Hereafter (Aakhirat)):

जबकि यह दुनिया अस्थायी और क्षणिक है, परलोक (आख़िरत) हमेशा के लिए है। परलोक (आख़िरत) असल मंजिल है, और यह दुनिया उस मंजिल तक पहुंचने का एक जरिया है। परलोक (आख़िरत) में कोई नाफ़र्मानी नहीं होगी, जबकि इस दुनिया में नाफ़र्मानी और परलोक (आख़िरत) को नकारने की प्रथा है। इस आयत में परलोक (आख़िरत) को पहले रखा गया है, ताकि उसकी शाश्वतता को प्रमुखता से दिखाया जा सके।

इस दुनिया में जीवन का उद्देश्य (Purpose of Life in the World):

दुनिया में जीवन एक मेहनत का समय है—घर बनाना, बच्चों को पालना, शिक्षा प्राप्त करना और अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए काम करना। यह एक समय है जब इंसान अपनी मेहनत के बीज बोता है। परलोक (आख़िरत) वह जगह है जहाँ उसे अपनी मेहनत का फल मिलेगा और अगर अल्लाह की मर्जी हो तो वहां शांति, आराम और सुख मिलेगा।

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