Transliteration: (Qad sa alahaa qawmum min qablikum summa asbahoo bihaa kaafireen)
इस आयत में उन पहले के उम्मतों, खासकर बनी इसराईल, की तरफ इशारा है, जिन्होंने अपने नबियों से बार-बार ज़्यादा सवालात किए। इन सवालों के नतीजे में सख़्त अहकाम उन पर लागू कर दिए गए। जब वे खुद ही अपनी मांगों से दीन को मुश्किल बना बैठे, तो आखिरकार वे उन हुक्मों को मानने से मुकर गए।
यह आयत ईमान वालों को आगाह करती है कि बेवजह के सवालों से बचें, जो न सिर्फ मुश्किलात पैदा करते हैं, बल्कि कभी-कभी इंकार और गुमराही का रास्ता भी बन जाते हैं।
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