कुरान - 5:102 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
قَدۡ سَأَلَهَا قَوۡمٞ مِّن قَبۡلِكُمۡ ثُمَّ أَصۡبَحُواْ بِهَا كَٰفِرِينَ

Transliteration: (Qad sa alahaa qawmum min qablikum summa asbahoo bihaa kaafireen)

तुमसे पहले के लोगों ने भी इसी तरह के सवालात किए थे, फिर वे उन्हीं बातों के इंकारी हो गए [274]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 102 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 102 की तफ़्सीर

✅ [274] हद से ज़्यादा सवाल करना मुसीबत और इंकार का सबब बना

इस आयत में उन पहले के उम्मतों, खासकर बनी इसराईल, की तरफ इशारा है, जिन्होंने अपने नबियों से बार-बार ज़्यादा सवालात किए। इन सवालों के नतीजे में सख़्त अहकाम उन पर लागू कर दिए गए। जब वे खुद ही अपनी मांगों से दीन को मुश्किल बना बैठे, तो आखिरकार वे उन हुक्मों को मानने से मुकर गए।

यह आयत ईमान वालों को आगाह करती है कि बेवजह के सवालों से बचें, जो न सिर्फ मुश्किलात पैदा करते हैं, बल्कि कभी-कभी इंकार और गुमराही का रास्ता भी बन जाते हैं।

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