कुरान - 5:105 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ عَلَيۡكُمۡ أَنفُسَكُمۡۖ لَا يَضُرُّكُم مَّن ضَلَّ إِذَا ٱهۡتَدَيۡتُمۡۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرۡجِعُكُمۡ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo 'alaikum anfusakum laa yadurrukum man dalla izah tadaitum; ilal laahi marji'ukum jamee'an fayunabbi'ukum bimaa kuntum ta'maloon)

ऐ ईमान लाने वालों! तुम अपनी सुध लो [280]। जो कोई गुमराह हो गया है, वह तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता, यदि तुम खुद हिदायत पर हो [281]। अल्लाह ही की ओर तुम सबको लौट कर जाना है, फिर वह तुम्हें बता देगा जो कुछ तुम किया करते थे [282]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 105 की तफ़्सीर

✅ [280] आत्म-सुधार की प्राथमिकता

इस आयत में ईमान वालों को आदेश दिया गया है कि पहले अपने आप को सुधारो। दूसरों की गलतियों और गुमराही में उलझने से पहले अपनी आत्मा की पवित्रता और अपने अमल की सच्चाई को देखो। जो अपने आप को नहीं सुधारता, वह दूसरों को भी सही रास्ता नहीं दिखा सकता। इस्लाह (सुधार) की शुरुआत अपने आप से होती है, ना कि दूसरों की निगरानी से।

✅ [281] सीधा रास्ता गुमराहों से महफूज़ करता है

अगर तुम हिदायत पर क़ायम हो, तो गुमराह लोगों की बातें या हरकतें तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकतीं। हां, इसका यह मतलब नहीं कि दावत और अम्र बिल म'आरूफ (अच्छाई का हुक्म देना) छोड़ दो, बल्कि हिदायत पर मज़बूती से टिके रहो और सही बात फैलाते रहो।

✅ [282] आख़िरत में हर अमल का हिसाब

हर इंसान को अल्लाह की तरफ लौटना है, और वहां हर एक अमल, चाहे वह अकेले किया हो या किसी के जरिये, खोल कर सामने रखा जाएगा। अल्लाह फ़रमाएगा: “हम तुम्हें बता देंगे” – यानी कोई भी अमल छुपा नहीं रहेगा। इसलिए हर मोमिन को अपने हर काम का जवाबदेह बन कर जीना चाहिए।

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