कुरान - 5:11 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ هَمَّ قَوۡمٌ أَن يَبۡسُطُوٓاْ إِلَيۡكُمۡ أَيۡدِيَهُمۡ فَكَفَّ أَيۡدِيَهُمۡ عَنكُمۡۖ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Yaa aiyuhal lazeena aamanuz kuroo ni'matallaahi 'alaikum iz hamma qawmun ai yabsutooo ilaikum aidiyahum fakaffa aidiyahum 'ankum wattaqullaah; wa'alal laahi fal yatawakalil mu'minoon)

ऐ ईमान वालो! अल्लाह की वह नेमत याद करो जो उसने तुम पर की [51], जब एक क़ौम ने तुम पर हाथ बढ़ाने का इरादा किया, तो अल्लाह ने उनके हाथ तुमसे रोक दिए [52]; और अल्लाह से डरते रहो, और मोमिनों को तो अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए [53] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-मायिदा – आयत 11 की तफ़्सीर

 

✅ [51] इस आयत के पीछे का वाक़िआ

एक बार हुज़ूर नबी करीम ﷺ अपने मुबारक सहाबा के साथ सफ़र में थे। जंगल में क़याम किया और दोपहर के समय सब लोग अलग-अलग पेड़ों के नीचे आराम करने लगे। हुज़ूर ﷺ ने अपनी तलवार एक पेड़ से बांध दी। एक बद्दू छिपकर आया और तलवार खींच ली। उसने कहा: अब तुम्हें मुझसे कौन बचाएगा?
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: अल्लाह!
हज़रत जिबरील (अलैहिस्सलाम) ने तलवार उसके हाथ से गिरा दी। हुज़ूर ﷺ ने तलवार उठाई और फ़रमाया: अब तुम्हें कौन बचाएगा?
बद्दू ने जवाब दिया: कोई नहीं।
तफ़्सीर अबू सऊद के मुताबिक़ वह बद्दू मुसलमान हो गया (अल्लाह बेहतर जानता है)। चूंकि वह बद्दू अपनी पूरी क़ौम की तरफ़ से आया था, इसलिए आयत में "जब एक क़ौम" कहा गया।

✅ [52] अल्लाह की नेमतों को याद करना एक हुक्म है

इससे यह मालूम हुआ कि अल्लाह की नेमतों को याद करना खुद अल्लाह का हुक्म है। मीलाद शरीफ़ की महफ़िलों का आयोजन और जश्न भी अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत यानी हुज़ूर ﷺ की विलादत की याद है। इसलिए अल्लाह की नेमतों को याद करना, उसका शुक्र अदा करने का एक ज़रिया है।
कुरआन फ़रमाता है: "और अपने रब की नेमतों का ऐलान करो" (सूरा 93, आयत 11)
एक और जगह फ़रमाता है: "अगर तुम शुक्र अदा करोगे तो मैं और बढ़ा दूँगा, और अगर नाशुक्रा बनोगे तो मेरा अज़ाब सख़्त है" (सूरा 14, आयत 7)

✅ [53] अल्लाह पर भरोसा और ज़राए का इस्तेमाल

याद रखना चाहिए कि डॉक्टरों से इलाज कराना या नेक बंदों से दुआ की दरख़्वास्त करना, तवक्कुल अलल्लाह (अल्लाह पर भरोसा) के खिलाफ़ नहीं है। यह कारण और नतीजे (सबब और मुसब्बिब) के उसूल के तहत आता है, जो खुद अल्लाह ने क़ायम किया है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now