कुरान - 5:112 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

112
إِذۡ قَالَ ٱلۡحَوَارِيُّونَ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ هَلۡ يَسۡتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ ٱلسَّمَآءِۖ قَالَ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Iz qaalal hawaariyyoona yaa 'Eesab na Maryama hal yastatee'u Rabbuka ai yunaz zila alainna maaa'idatam minas samaaa'i qaalat taqul laaha in kuntum mu'mineen)

यह जब हवारीयों ने कहा: ऐ ईसा, मरयम के बेटे, क्या आपका रब हमारे लिए आसमान से एक खाना भरा दस्तरख़्वान उतार सकता है? [308] ईसा ने कहा: अल्लाह से डर रखो, अगर तुम सच्चे मोमिन हो [309]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 112 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 112 की तफ़्सीर

✅ [307] हवारीयों की पहचान और पवित्रता

हवारी शब्द "हूर" से निकला है, जिसका अर्थ है शुद्ध सफेदी। यह उनके ईमान की पाकीज़गी का प्रतीक है। वे ईसा (अलैहिस्सलाम) के सच्चे अनुयायी थे। उनमें मछुआरे, धोबी, रंगरेज़ जैसे सामान्य लोग शामिल थे और उनकी संख्या बारह थी। उनका साथ और समर्पण मज़बूत था, लेकिन उन्हें अभी इलाही अदब की पूरी समझ नहीं थी।

✅ [308] अदब की समझ में शुरुआती कमी

इस मौक़े पर हवारीयों को अदब के उसूलों की पूरी समझ नहीं थी। उन्होंने ईसा (अलैहिस्सलाम) को सिर्फ नाम से पुकारा और अल्लाह के लिए आम लहजे में बात की। लेकिन यह उनके मासूमियत और अज्ञान के कारण था, इसलिए इसे बे-अदबी नहीं माना गया। इससे पता चलता है कि अदब सीखना भी ईमान के बढ़ने का हिस्सा है।

✅ [309] मोजिज़ा माँगना और तक़्वा के साथ माँगने की नसीहत

मोजिज़ा माँगना सच्चे ईमान वालों का तरीका नहीं है। ईसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह से डरने की नसीहत दी, क्योंकि अल्लाही निज़ाम को चुनौती देना खतरे से खाली नहीं होता — खासतौर पर तब जब मोजिज़ा आ जाए और फिर उसका इनकार किया जाए। सच्चा ईमान निशानियों को नम्रता से स्वीकार करता है, न कि शर्तों के साथ।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now