Transliteration: (Qaala 'Eesab nu Maryamal laahumma Rabbanaaa anzil 'alainaa maaa'idatam minas samaaa'i takoonu lanaa 'eedal li awwalinaa wa aakhirinaa wa Aayatam minka warzuqnaa wa Anta khairur raaziqeen)
यह आयत साबित करती है कि बरकत वाले खास दिनों को मनाना — जैसे किसी नबी का जन्मदिन — खुद नबियों की सुन्नत से है। अगर आसमान से खाना उतरने जैसा वाक़िआ जश्न के क़ाबिल है, तो हज़रत मुहम्मद ﷺ की विलादत, जो हमेशा की हिदायत लेकर आई, उससे भी ज़्यादा जश्न मनाने के लायक़ है। नबियों ने खुद कुछ खास दिनों को अहमियत दी और मनाया। ईसाइयों ने भी इस खाने की मेज़ को एक यादगार दिन के तौर पर मनाया।
रज़्ज़ाक़ (रोज़ी देने वाला) के तीन मतलब होते हैं:
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