कुरान - 5:115 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

115
قَالَ ٱللَّهُ إِنِّي مُنَزِّلُهَا عَلَيۡكُمۡۖ فَمَن يَكۡفُرۡ بَعۡدُ مِنكُمۡ فَإِنِّيٓ أُعَذِّبُهُۥ عَذَابٗا لَّآ أُعَذِّبُهُۥٓ أَحَدٗا مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Qaalal laahu innee munaz ziluhaa 'alaikum famai yakfur ba'du minkum fa inneee u'azzibuhoo 'azaabal laaa u'azzibuhooo ahadam minal 'aalameen)

अल्लाह ने फ़रमाया: मैं उसे तुम्हारे लिए उतार रहा हूँ, लेकिन जो इसके बाद भी कुफ़्र करेगा, तो यक़ीनन मैं उसे ऐसा अज़ाब दूँगा, जैसा मैंने दुनिया वालों में किसी को नहीं दिया है [314]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 115 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 115 की तफ़्सीर

✅ [314] आने वाले हर इंकारी के लिए सख़्त चेतावनी

यह ऐलान सिर्फ हवारीयों के लिए नहीं था, बल्कि हर उस शख़्स के लिए था जो भविष्य में भी ऐसे खुले मोजिज़े को देखने के बाद कुफ़्र करेगा। जो कोई हक़ की ऐसी वाज़ेह निशानी देखने के बाद भी इंकार करता है, उसे बेहद सख़्त और अनोखा अज़ाब दिया जाएगा, जो दुनिया की किसी भी क़ौम को नहीं दिया गया। यह बताता है कि हक़ को देखने के बाद उसका इंकार करना, अल्लाह की नज़र में बेहद संगीन गुनाह है।

✅ [315] मोजिज़ा देखने के बाद इंकार, अल्लाही अज़ाब को दावत देता है

इस आयत से ये सबक़ मिलता है कि मोजिज़ा मांगना और फिर ईमान न लाना, अल्लाह के अज़ाब को खुद बुलाने जैसा है। अबू जहल को भी कई मोजिज़े दिखाए गए थे, लेकिन उसे अज़ाब नहीं मिला, क्योंकि हज़रत मुहम्मद ﷺ मौजूद थे। जैसा कि अल्लाह ने फ़रमाया: “अल्लाह उन्हें अज़ाब नहीं देगा जब तक कि तुम उनके बीच मौजूद हो” (सूरा अल-अन्फाल 8:33)। यानी नबी की मौजूदगी खुद एक रहमत और हिफाज़त थी—even उन काफ़िरों के लिए।

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