Transliteration: (Maa qultu lahum illaa maaa amartanee bihee ani'budul laaha Rabbeee wa Rabbakum; wa kuntu 'alaihim shaheedam maa dumtu feehim falammaa tawaffaitanee kunta Antar Raqeeba 'alaihim; wa Anta 'alaa kulli shai'in Shaheed)
हज़रत ईसा (अ.स.) यहाँ दोहराते हैं कि उन्होंने सिर्फ वही कहा जो अल्लाह ने हुक्म दिया। पैग़म्बर अपनी मरज़ी से कोई बात नहीं कहते, उनकी हर बात वही (इल्हाम) पर आधारित होती है, जिससे उनके पैग़म्बरी दर्जे की तस्दीक होती है।
“मेरा रब और तुम्हारा रब” कहकर हज़रत ईसा (अ.स.) ने अपने इंसान होने की गवाही दी और तौहीद की दावत दी। यह बात ईसाइयों के 'ईसा को ख़ुदा' मानने के अकीदे की खुली तर्दीद है।
ईसा (अ.स.) ने कहा कि जब तक वे अपनी क़ौम के बीच थे, वे उन पर निगरान और गवाह थे। लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें उठा लिया, तब अल्लाह ही निगरान रहा। इससे यह बात साबित होती है कि पैग़म्बरों की ज़िम्मेदारी उनकी ज़िन्दगी तक होती है, उसके बाद अल्लाह की निगरानी चलती है।
“हर चीज़ तेरे सामने मौजूद है” से यह साबित होता है कि अल्लाह का इल्म और निगरानी हर ज़माने, हर जगह और हर हालत को शामिल करती है। अल्लाह का “शहीद” होना मतलब है — हर चीज़ को देखना, जानना और गवाही देना।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat