कुरान - 5:117 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
مَا قُلۡتُ لَهُمۡ إِلَّا مَآ أَمَرۡتَنِي بِهِۦٓ أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمۡۚ وَكُنتُ عَلَيۡهِمۡ شَهِيدٗا مَّا دُمۡتُ فِيهِمۡۖ فَلَمَّا تَوَفَّيۡتَنِي كُنتَ أَنتَ ٱلرَّقِيبَ عَلَيۡهِمۡۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ

Transliteration: (Maa qultu lahum illaa maaa amartanee bihee ani'budul laaha Rabbeee wa Rabbakum; wa kuntu 'alaihim shaheedam maa dumtu feehim falammaa tawaffaitanee kunta Antar Raqeeba 'alaihim; wa Anta 'alaa kulli shai'in Shaheed)

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा सिवाय उस बात के जो तूने मुझे हुक्म दी थी [319], कि अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब [320]। और मैं उन पर निगरान रहा जब तक मैं उनके बीच रहा। फिर जब तूने मुझे उठा लिया, तो तू ही उन पर निगरान था, और हर चीज़ तेरे सामने मौजूद है [322]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 117 की तफ़्सीर

✅ [319] पैग़म्बर सिर्फ वही कहते हैं जो अल्लाह का हुक्म हो

हज़रत ईसा (अ.स.) यहाँ दोहराते हैं कि उन्होंने सिर्फ वही कहा जो अल्लाह ने हुक्म दिया। पैग़म्बर अपनी मरज़ी से कोई बात नहीं कहते, उनकी हर बात वही (इल्हाम) पर आधारित होती है, जिससे उनके पैग़म्बरी दर्जे की तस्दीक होती है।

✅ [320] ईसा (अ.स.) की अल्लाह की बंदगी की खुली दावत

“मेरा रब और तुम्हारा रब” कहकर हज़रत ईसा (अ.स.) ने अपने इंसान होने की गवाही दी और तौहीद की दावत दी। यह बात ईसाइयों के 'ईसा को ख़ुदा' मानने के अकीदे की खुली तर्दीद है।

✅ [321] ज़मीन पर रहते हुए निगरानी की ज़िम्मेदारी

ईसा (अ.स.) ने कहा कि जब तक वे अपनी क़ौम के बीच थे, वे उन पर निगरान और गवाह थे। लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें उठा लिया, तब अल्लाह ही निगरान रहा। इससे यह बात साबित होती है कि पैग़म्बरों की ज़िम्मेदारी उनकी ज़िन्दगी तक होती है, उसके बाद अल्लाह की निगरानी चलती है।

✅ [322] अल्लाह के लिए सब कुछ हाज़िर है

“हर चीज़ तेरे सामने मौजूद है” से यह साबित होता है कि अल्लाह का इल्म और निगरानी हर ज़माने, हर जगह और हर हालत को शामिल करती है। अल्लाह का “शहीद” होना मतलब है — हर चीज़ को देखना, जानना और गवाही देना।

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