Transliteration: (Qaalal laahu haaza yawmu yanfa'us saadiqeena sidquhum; lahum janaatunn tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaaa abadaa; radiyal laahu 'anhum wa radoo 'anh; zaalikal fawzul 'azeem)
क़यामत के दिन सिर्फ़ वही लोग कामयाब होंगे जो दुनिया में ईमान और सच्चाई पर क़ायम रहे। झूठ, दग़ाबाज़ी, या सिर्फ़ नसब (वंश) का घमंड किसी को नहीं बचा सकेगा। हर शख़्स को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा — "जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।"
"उनके लिए हैं जन्नतें" — इससे पता चलता है कि जन्नत अल्लाह की तरफ़ से उनका निजी इनआम होगी। हर मोमिन को एक से ज़्यादा बाग़ात, और उनके नीचे बहने वाली दूध, शहद और साफ़ पानी की नहरें मिलेंगी। ये नेअमतें हमेशा की होंगी, कभी ख़त्म नहीं होंगी।
अल्लाह अपने सच्चे बंदों के थोड़े से भी नेक अमल से राज़ी हो जाएगा, और वे अपने रिज़्क़, तक़सीर और क़ज़ा-क़दर से खुश रहेंगे। ये आयत बताती है कि हर सच्चा मोमिन अल्लाह की रज़ामंदी का हक़दार है — इसलिए सिर्फ़ सहाबा ही नहीं, बल्कि हर नेक मोमिन के लिए "रज़ियल्लाहु अन्हु" कहा जा सकता है।
दुनियावी दौलत या हुकूमत नहीं, बल्कि अल्लाह की ख़ुशी और कुबूलियत ही असली कामयाबी है। बंदगी, ईमानदारी और रज़ा बि-क़ज़ा (अल्लाह की तदबीर पर राज़ी रहना) ही सच्ची फ़तह और निजात है।
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