Transliteration: (Wa iz qaalal laahu yaa 'Eesab na Maryama 'a-anta qulta linnaasit takhizoonee wa ummiya ilaahaini min doonil laahi qaala Subhaanaka maa yakoonu leee an aqoola maa laisa lee bihaqq; in kuntu qultuhoo faqad 'alimtah; ta'lamu maa fee nafsee wa laaa a'alamu maa fee nafsik; innaka Anta 'Allaamul Ghuyoob)
हज़रत ईसा (अ.स.) साफ़ तौर पर कह रहे हैं कि उन्होंने वही कहा जो अल्लाह का हुक्म था — यानी तौहीद की दावत देना। उन्होंने कभी शिर्क या खुद को इबादत के क़ाबिल ठहराना नहीं सिखाया। यह बयान पैग़म्बरों की सच्चाई और उनकी जिम्मेदारी की तस्दीक है।
ईसा (अ.स.) ने कहा कि अल्लाह ही मेरा भी रब है और तुम्हारा भी। यह बताता है कि हर पैग़म्बर का पैग़ाम एक ही रहा है — ख़ालिस अल्लाह की इबादत करना, जिसमें किसी और को शरीक न किया जाए।
जब तक ईसा (अ.स.) ज़मीन पर थे, वे अपनी क़ौम पर गवाह और निगरान थे। लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें उठा लिया, तो निगरानी का इख्तियार सिर्फ अल्लाह को है। ईसा (अ.स.) यह साबित करते हैं कि पैग़म्बर के बाद की गुमराही की ज़िम्मेदारी उस पैग़म्बर पर नहीं होती। अल्लाह हर चीज़ से ख़बर रखने वाला और गवाह है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat