कुरान - 5:116 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

116
وَإِذۡ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ءَأَنتَ قُلۡتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِي وَأُمِّيَ إِلَٰهَيۡنِ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ قَالَ سُبۡحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِيٓ أَنۡ أَقُولَ مَا لَيۡسَ لِي بِحَقٍّۚ إِن كُنتُ قُلۡتُهُۥ فَقَدۡ عَلِمۡتَهُۥۚ تَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِي وَلَآ أَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِكَۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّـٰمُ ٱلۡغُيُوبِ

Transliteration: (Wa iz qaalal laahu yaa 'Eesab na Maryama 'a-anta qulta linnaasit takhizoonee wa ummiya ilaahaini min doonil laahi qaala Subhaanaka maa yakoonu leee an aqoola maa laisa lee bihaqq; in kuntu qultuhoo faqad 'alimtah; ta'lamu maa fee nafsee wa laaa a'alamu maa fee nafsik; innaka Anta 'Allaamul Ghuyoob)

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा सिवाय उस बात के जो तूने मुझे हुक्म दी थी [319], कि अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब [320]। और मैं उन पर उसी वक़्त तक निगरानी करता रहा जब तक मैं उनके बीच रहा। फिर जब तूने मुझे उठा लिया, तो तू ही उन पर निगरान था, और तू तो हर चीज़ का गवाह है [321]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 116 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 116 की तफ़्सीर

✅ [319] अल्लाह के हुक्म के अलावा कुछ नहीं कहा

हज़रत ईसा (अ.स.) साफ़ तौर पर कह रहे हैं कि उन्होंने वही कहा जो अल्लाह का हुक्म था — यानी तौहीद की दावत देना। उन्होंने कभी शिर्क या खुद को इबादत के क़ाबिल ठहराना नहीं सिखाया। यह बयान पैग़म्बरों की सच्चाई और उनकी जिम्मेदारी की तस्दीक है।

✅ [320] तौहीद की दावत — मेरा और तुम्हारा रब एक

ईसा (अ.स.) ने कहा कि अल्लाह ही मेरा भी रब है और तुम्हारा भी। यह बताता है कि हर पैग़म्बर का पैग़ाम एक ही रहा है — ख़ालिस अल्लाह की इबादत करना, जिसमें किसी और को शरीक न किया जाए।

✅ [321] हज़रत ईसा (अ.स.) की निगरानी सिर्फ अपनी मौजूदगी तक थी

जब तक ईसा (अ.स.) ज़मीन पर थे, वे अपनी क़ौम पर गवाह और निगरान थे। लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें उठा लिया, तो निगरानी का इख्तियार सिर्फ अल्लाह को है। ईसा (अ.स.) यह साबित करते हैं कि पैग़म्बर के बाद की गुमराही की ज़िम्मेदारी उस पैग़म्बर पर नहीं होती। अल्लाह हर चीज़ से ख़बर रखने वाला और गवाह है।

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