Transliteration: (Qaaloo nureedu an naakula minhaa wa tatama 'inna quloo bunaa wa na'lama an qad sadaqtana wa nakoona 'alaihaa minash shaahideen)
हवारीयों ने रूहानी इत्मीनान की तलब की। वे चाहते थे कि खाना खुद देख कर खाएँ, जिससे दिलों को सुकून मिले। यह एक अक़ली यक़ीन (इल्म-उल-यक़ीन) से आँखों से देखने वाले यक़ीन (अयन-उल-यक़ीन) की तरफ़ बढ़ने की मिसाल है — जैसा कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने कहा था: "मुझे दिखा कि तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है" (सूरा 2:260)। यह बताता है कि नबी का ईमान सबसे ऊँचा होता है, और आम लोगों का ईमान उसके मुक़ाबले में कमतर होता है।
हवारी चाहते थे कि वे ईसा (अलैहिस्सलाम) की नबूवत की आँखों देखी गवाही दे सकें, ताकि आने वाली नस्लों के लिए उनकी बात पर यक़ीन हो। ईसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें हिदायत दी कि तीस दिन रोज़ा रखें, फिर दुआ करें — जिसके बाद आसमान से खाना उतरा। उनका मक़सद सिर्फ़ खाना नहीं, बल्कि रूहानी तस्दीक और ऐतिहासिक गवाही हासिल करना था।
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