Transliteration: (Iz qaalal laahu yaa 'Eesab-na-Maryamaz kur ni'matee 'alaika wa 'alaa waalidatika; iz aiyattuka bi Roohil Qudusi tukallimun naasa fil mahdi wa kahlanw wa iz 'allamtukal kitaaba wal Hikmata wa Tawraata wal Injeela wa iz Takhluqu minat teeni kahai 'atit tairi bi iznee fatanfukhu feeha fatakoonu tairam bi iznee wa tubri'ul akmaha wal abrasa bi iznee wa iz tukhrijul mawtaa bi iznee wa iz kafaftu Baneee Israaa'eela 'anka iz ji'tahum bil baiyinaati fa qaalal lazeena kafaroo minhum in haazaaa illaa sihrum mubeen)
अल्लाह ने हज़रत ईसा (अ.स.) को "कलिमतुल्लाह" और "रूहुल्लाह" का दर्जा दिया, और उनकी मदद के लिए हज़रत जिब्रील (अ.स.) को मुकर्रर किया। उनकी माँ हज़रत मरयम (अ.स.) को औरतों में सबसे अफ़ज़ल बनाया गया। जब यहूदियों ने उन पर इल्ज़ाम लगाए, तो अल्लाह ने ईसा (अ.स.) को झूले में बोलने की ताक़त दी, ताकि वो अपनी माँ की पाकीज़गी की गवाही दें।
हज़रत ईसा (अ.स.) को किताब, हिकमत, तौरात और इंजील की तालीम अल्लाह ने ख़ुद दी। यह इस बात की दलील है कि नबी अल्लाह से सीधा इल्म लेते हैं। उनकी पहली ज़िन्दगी में वह तौरात व इंजील को मानते थे, और क़ियामत के क़रीब दूसरी आमद पर, वह क़ुरआन और हदीस के मुताबिक़ अमल करेंगे, बिना किसी इंसानी उस्ताद के, क्योंकि वह इल्म उनके दिल में डाला जाएगा।
हज़रत ईसा (अ.स.) ने मिट्टी से परिंदा बनाया और अल्लाह की इजाज़त से उसमें फूँक मारी, तो वह ज़िन्दा परिंदा बन गया। यह रूहानी फूँक की ताक़त की दलील है, जैसे जिब्रील (अ.स.) ने मरयम (अ.स.) के दामन में फूँका, या इस्राफ़ील (अ.स.) सूर में फूँकेंगे—इन सब में अल्लाह का हुक्म चलता है।
ईसा (अ.स.) ने पैदाइशी अंधों और कोढ़ियों को शिफ़ा दी, मगर हर चीज़ अल्लाह की इजाज़त से हुई। यह दलील है कि शिफ़ा अल्लाह के हुक्म से होती है। जैसे ज़मज़म का पानी, मदीना की मिट्टी, और हज़रत अय्यूब (अ.स.) के चश्मे से शिफ़ा मिलती थी—ये सब इलाही करामात हैं।
ईसा (अ.स.) ने पुराने मुर्दों को भी ज़िन्दा किया, जैसे शाम बिन नूह (अ.स.)। यह दिखाता है कि अल्लाह चाहे तो अपने नबियों और औलिया के ज़रिए भी मुर्दों को ज़िन्दा कर सकता है। इसी तरह की करामात से गौस-ए-आज़म रह. के बारे में मशहूर है कि उन्होंने डूबता हुआ जहाज़ बचाया।
"जब मैंने बनी इस्राईल को तुमसे रोका"—इससे मुराद है कि जब यहूद हज़रत ईसा (अ.स.) को सूली देने आए, तो अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और ज़िन्दा आसमान पर उठा लिया, और दुश्मन धोखे में रह गए।
हज़रत ईसा (अ.स.) के ज़माने में इल्म-ए-तिब्ब (मेडिकल साइंस) को क़द्र दी जाती थी, तो अल्लाह ने उन्हें शिफ़ा देने वाले मोजिज़ात दिए। हज़रत मूसा (अ.स.) के ज़माने में जादू मशहूर था, तो उन्हें अस्ली मोजिज़ात दिए गए जो जादू पर भारी पड़े। अगर मिर्ज़ा ग़ुलाम क़ादियानी सच्चा नबी होता, तो उसे वक़्त की साइंस और टेक्नोलॉजी से बेहतर मोजिज़ा मिलता—मगर उसकी नाकामी ही उसके झूठे होने की दलील है।
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