Transliteration: (Inee ureedu an tabooo'a bi ismee wa ismika fatakoona min As-haabin Naar; wa zaalika jazaaa'uz zaalimeen)
यह इतिहास का पहला क़त्ल था। यहाँ जो "मेरा गुनाह" कहा गया है, उसका मतलब यह नहीं कि गुनाह हाबील ने किया, बल्कि यह उस फ़ेहरिस्त में आने वाला इज़हार है जिसमें जुर्म करने वाले पर इल्ज़ाम डाला जाता है। असल गुनाह तो क़ाबील ने किया था — उसने अपने भाई को मार डाला। कुरआन में इसी तरह कुछ जगहों पर नबी के लिए "गुनाह" जैसे अल्फ़ाज़ आये हैं, लेकिन असल मुराद उनके उम्मती होते हैं, जैसे: "और अपने गुनाहों की मग़फ़िरत माँग" (40:55)।
यहाँ "तेरा गुनाह" से मुराद क़ाबील के पहले के गुनाह हैं — जैसे हसद (जलन), माँ-बाप की नाफ़रमानी, नाजायज़ aurat से निकाह की कोशिश, और अल्लाह के फ़ैसले को न मानना। ये सब पहले के गुनाह थे जो उसके गिरते हुए किरदार की निशानी थे।
चूँकि क़ाबील ने लगातार अल्लाह के हुक्मों को ठुकराया और ज़ुल्म किया, इसलिए वह उन लोगों में शामिल हुआ जो जहन्नम के साथी हैं। यह सख़्त सज़ा उन तमाम ज़ालिमों के लिए है जो अल्लाह की बातों को नहीं मानते और हक़ से मुँह मोड़ते हैं।
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