Transliteration: (Faba'asal laahu ghuraabai yabhasu fil ardi liyuriyahoo kaifa yuwaaree saw'ata akheeh; qaala yaa wailataaa a'ajaztu an akoona misla haazal ghuraabi fa uwaariya saw ata akhee fa asbaha minan naadimeen)
दो कौवे क़ाबील के सामने लड़े, फिर एक ने दूसरे को मार डाला।
बचा हुआ कौवा ज़मीन कुरेदने लगा, अपनी चोंच और पंजों से एक गड्ढा बनाया, मरे हुए कौवे को उसमें डालकर मिट्टी से ढँक दिया।
यह अल्लाह की ओर से एक संकेत था, जिससे क़ाबील को यह सिखाया गया कि अपने भाई हाबील की लाश को कैसे दफ़न किया जाए।
क़ाबील का पछतावा सच्ची तौबा नहीं था, बल्कि केवल इस बात का दुख था कि वह लाश को दफ़न भी न कर सका।
उस समय सिर्फ पछताना तौबा के लिए काफ़ी नहीं माना जाता था।
असली नीयत क्या थी, यह अल्लाह ही बेहतर जानता है।
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