कुरान - 5:33 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
إِنَّمَا جَزَـٰٓؤُاْ ٱلَّذِينَ يُحَارِبُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَسۡعَوۡنَ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَسَادًا أَن يُقَتَّلُوٓاْ أَوۡ يُصَلَّبُوٓاْ أَوۡ تُقَطَّعَ أَيۡدِيهِمۡ وَأَرۡجُلُهُم مِّنۡ خِلَٰفٍ أَوۡ يُنفَوۡاْ مِنَ ٱلۡأَرۡضِۚ ذَٰلِكَ لَهُمۡ خِزۡيٞ فِي ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌ

Transliteration: (Innamaa jazaaa'ul lazeena yuhaariboonal laaha wa Rasoolahoo wa yas'awna fil ardi fasaadan ai yuqattalooo aw yusallabooo aw tuqatta'a aideehim wa arjuluhum min khilaafin aw yunfaw minalard; zaalika lahum khizyun fid dunyaa wa lahum fil Aakhirati 'azaabun 'azeem)

जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं [113] और धरती में फ़साद फैलाने की कोशिश करते हैं, उनका बदला बस यही है कि उन्हें कत्ल किया जाए, या सूली पर चढ़ाया जाए, या उनके हाथ-पाँव विपरीत दिशाओं से काट दिए जाएँ, या उन्हें देश से निकाल दिया जाए [114]। यह उनके लिए दुनिया में अपमान है, और आख़िरत में उनके लिए एक बड़ा अज़ाब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-मायदा – आयत 33 की तफ़्सीर

 

✅ [113] नाज़िल होने का कारण

यह आयत बनी उरैना क़बीले की एक दर्दनाक घटना के बाद नाज़िल हुई।
ये लोग मदीना मुनव्वरा आए और इस्लाम कुबूल किया, लेकिन बीमार पड़ गए।
रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें ज़कात में दिए गए ऊँटों का दूध और पेशाब पीने को कहा, जिससे वे ठीक हो गए।
लेकिन बाद में उन्होंने नाफरमानी करते हुए पंद्रह ऊँट चुरा लिए और भाग गए।
हज़रत यास्सार (रज़ि.) को उन्हें वापस लाने भेजा गया, पर उन्होंने क्रूरता से उनके हाथ-पाँव काटकर उन्हें शहीद कर दिया।
बाद में जब वे गिरफ़्तार हुए, तो यह आयत उतरी।

✅ [114] अपराधियों के प्रकार और उनके अनुसार सज़ाएं

इस आयत में फ़साद फैलाने वालों की सज़ाएं उनके जुर्म के अनुसार दी गई हैं:

  • जो रास्ता रोकता है, मगर कुछ नहीं लूटता:
    सज़ा: देश निकाला (हवास से निकाल दिया जाए)
  • जो रास्ता रोककर माल लूटता है:
    सज़ा: हाथ और पैर विपरीत दिशाओं से काटे जाएँ
  • जो रास्ता रोककर माल लूटते हुए किसी को क़त्ल कर देता है:
    सज़ा: मौत या सूली पर चढ़ाया जाना

ये सज़ाएं समाज में फ़साद रोकने और डर पैदा करने के लिए रखी गई हैं।

✅ दुनिया और आख़िरत की सज़ा

ऐसे जुर्म करने वालों को दुनिया में ज़लील और रुस्वा किया जाएगा, ताकि लोग सबक लें।
आख़िरत में उनके लिए सख़्त अज़ाब होगा, जो अल्लाह की सच्ची और अटल इंसाफ़ पर आधारित होगा।

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