कुरान - 5:35 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱبۡتَغُوٓاْ إِلَيۡهِ ٱلۡوَسِيلَةَ وَجَٰهِدُواْ فِي سَبِيلِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ

Transliteration: (yaaa aiyuhal lazeena aamanut taqul laaha wabtaghooo ilaihil waseelata wa jaahidoo fee sabeelihee la'allakum tuflihoon)

हे ईमान वालों! अल्लाह से डरो, और उसकी ओर पहुँचने का माध्यम तलाश करो [117], और उसके मार्ग में संघर्ष करो ताकि तुम सफल हो सको [118]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-मायदा – आयत 35 की तफ़्सीर

 

✅ [117] अल्लाह से डरना ही क़रीब होने की बुनियाद है

अल्लाह से डरने का आदेश सबसे पहले आया है, जो दर्शाता है कि तक़्वा (अल्लाह का भय) हर आध्यात्मिक तरक़्क़ी की बुनियादी शर्त है। इससे मालूम होता है कि एक मोमिन का अल्लाह से रिश्ता अदब और उसकी मौजूदगी की शऊर पर आधारित होना चाहिए। "माध्यम तलाश करो" से यह साबित होता है कि अल्लाह के नबी और उसके नेक बंदों के ज़रिये अल्लाह का क़ुर्ब हासिल किया जाता है। इसमें नेक अमल, दुआएं, और अल्लाह के क़रीबी बंदों की तरफ़ रुजू शामिल हैं। यह बात भी साफ़ होती है कि इस क़रीबी को हासिल करने के लिए कोशिश और मेहनत ज़रूरी है।

✅ [118] वसीला और कोशिश के बिना सफलता नामुमकिन है

यहाँ वाज़ेह किया गया है कि कोई भी नेक मोमिन अल्लाह तक बग़ैर वसीले के नहीं पहुँच सकता, सिवाय रसूल अल्लाह ﷺ के, जो हर उम्मती के लिए यग़ाना और आलमी वसीला हैं। इससे यह भी साबित होता है कि रूहानी दर्जात की सिलसिलेवार तरतीब है और अल्लाह की राह में जिहाद और मेहनत के बग़ैर कामयाबी और क़ुर्ब मुमकिन नहीं। इसलिए इस आयत में तक़्वा, वसीला की तलाश और अल्लाह की राह में संघर्ष को कामयाबी का मुकम्मल रास्ता बताया गया है — दुनिया और आख़िरत दोनों के लिए।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now