Transliteration: (Yas'aloonaka maazaaa uhilla lahum; qul uhilla lakumuttaiyibaatu wa maa'allamtum minal jawaarihi mukallibeena tu'allimoonahunnamimmaa 'allamakumul laahu fakuloo mimmaaa amsakna 'alaikum wazkurus mal laahi 'alaih; wattaqul laah; innal laaha saree'ul hisaab)
इससे मुराद ऐसे जानवर हैं जिनका शिकार करना और खाना इस्लाम में जायज़ है। ध्यान दें: हनफ़ी मस्लक के मुताबिक मछली के सिवा कोई भी समुंदरी जानवर हलाल नहीं, और ज़मीन पर बिना खून वाले कीड़े मकोड़े (जैसे मेंढक, साँप आदि) हराम हैं, सिवाय टिड्डी के। तेज़ पंजों वाले परिंदे और शिकार करने वाले पक्षी खाना हराम है। पाक और अच्छी चीज़ें यानी वह जो शरीअत में हलाल और तबीअत के लिए मुफीद हों।
इस्लाम में जो चीज़ें हराम नहीं, वे फितरतन पाक और हलाल मानी जाती हैं। लज़ीज़ और मज़ेदार हलाल खाना खाना गुनाह नहीं, बल्कि सच्चा परहेज़गारी हराम से बचने में है, न कि हलाल को खुद पर हराम करने में।
इसमें शामिल हैं कुत्ते, चीते, बाज़, शिकार के लिए तैयार किए गए दूसरे परिंदे। इन्हें इस तरह सिखाया जाता है कि ये शिकार को खुद न खाएं, बल्कि मालिक के हुक्म पर वापस लाएं। जैसे जंगली बिल्ली अगर मुर्गी मार दे, तो वह हराम है, क्योंकि वह सिखाई हुई नहीं, और वह शिकार खुद के लिए करती है।
अगर आपका सिखाया हुआ जानवर शिकार को पकड़ कर लाए, और उसे न खाए, तो वह शिकार आपके लिए हलाल है। लेकिन अगर उसने उसका कुछ हिस्सा खा लिया, तो वह हराम हो जाता है, क्योंकि फिर वह शिकार आपके लिए नहीं, जानवर के लिए हुआ।
जब आप अपने शिकारी जानवर को छोड़ें, तो बिस्मिल्लाह पढ़ना ज़रूरी है। यही इस्लामी तरीके से हलाल शिकार करने का एक अहम हिस्सा है।
इसमें अल्लाह की तेज़ और मुकम्मल हिसाब लेने की ताक़त का बयान है। क़ियामत के दिन, कुछ ही घड़ियों में तमाम मख़लूक़ का हिसाब पूरा हो जाएगा, और उसके बाद हुज़ूर ﷺ का असली मुक़ाम और शान ज़ाहिर होगी।
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