कुरान - 5:58 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَإِذَا نَادَيۡتُمۡ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ ٱتَّخَذُوهَا هُزُوٗا وَلَعِبٗاۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ قَوۡمٞ لَّا يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa izaa naadaitum ilas Salaatit takhazoohaa huzu wan'w wa la'ibaa; zaalika biannnahum qawmul laa ya'qiloon)

"और जब तुम लोगों को नमाज़ (सलात) के लिए बुलाते हो [179], तो वे उसका मज़ाक़ उड़ाते हैं और उसे खेल समझते हैं। यह इस वजह से है कि वे ऐसे लोग हैं जो समझ नहीं रखते [180]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 58 की तफ़्सीर

 

✅ [179] अज़ान का मज़ाक़ उड़ाना – एक मिसाल

हज़रत इमाम सअदी रहिमहुल्लाह ने मदीना का एक वाक़िआ बयान किया:
एक ईसाई मुअज्जिन की अज़ान में "अशहदु अन्ना मुहम्मद रसूलुल्लाह" सुनकर मज़ाक़ उड़ाता और लानतें करता था — (अल्लाह हमें महफ़ूज़ रखे)।
एक रात उसके घर में आग लग गई जो पूरा घर ख़ाक कर गई। यह वाक़िआ अल्लाह की क़हर व अदल की निशानी है।

✅ [180] नसीहतें और सबक़

  • अज़ान इस्लाम में फ़र्ज़ नमाज़ों के लिए शर्त है।
  • यह आयत इस पर दलील है कि अज़ान को मज़ाक़ बनाना या उसका मज़ाक़ उड़ाना बहुत बड़ा गुनाह है।
  • किसी भी इबादत — चाहे वो अज़ान हो, नमाज़, मस्जिद, काबा — का मज़ाक़ उड़ाना कुफ्र के बराबर है।
  • ऐसा रवैया रखने वाले लोग अक़्ल से खाली हैं, और अल्लाह की नज़रों में मज़मूम (निंदनीय) हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now