Transliteration: (Qul hal unabbi'ukum bisharrim min zaalika masoobatan 'indal laah; malla'ana hul laahu wa ghadiba 'alaihi wa ja'ala minhumul qiradata wal khanaazeera wa 'abadat Taaghoot; ulaaa'ika sharrum makaananw wa adallu 'an Sawaaa'is Sabeel)
इस आयत से यह बात ज़ाहिर होती है कि जो लोग तमाम पैग़म्बरों पर ईमान रखते हैं, वो अल्लाह की रहमत के साए में होते हैं। लेकिन जो कोई एक भी नबी का इनकार करता है, उस पर अल्लाह का ग़ज़ब और लानत होती है।
यह हिस्सा यहूदियों को मुक़ातिब करता है, और उनके अतीत और हाल की याद दिलाता है:
इस आयत से यह बात साबित होती है कि सिर्फ़ नबीज़ादे होना या पीर-पैग़म्बर की औलाद होना कोई फ़ज़ीलत नहीं देता, जब तक कि इंसान अल्लाह का फ़रमाबरदार न हो।
उनकी यह तकब्बुर भरी सोच कि वो सबसे बेहतर हैं, उनके असल अमल के मुक़ाबले में बिल्कुल ग़लत साबित होती है।
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