कुरान - 5:61 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
وَإِذَا جَآءُوكُمۡ قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَقَد دَّخَلُواْ بِٱلۡكُفۡرِ وَهُمۡ قَدۡ خَرَجُواْ بِهِۦۚ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا كَانُواْ يَكۡتُمُونَ

Transliteration: (Wa izaa jaaa'ookum qaalooo aamannaa wa qad dakhaloo bilkufri wa hum qad kharajoo bih; wallaahu a'lamu bimaa kaanoo yaktumoon)

"और जब वे तुम्हारे पास आते हैं [184], तो कहते हैं: 'हम ईमान लाए।' हालाँकि वे कुफ़्र की हालत में दाख़िल हुए और उसी कुफ़्र की हालत में निकल गए [185]। और अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ वे छिपा रहे हैं [186]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 61 की तफ़्सीर

 

✅ [184] नाज़िल होने का कारण

यह आयत उन यहूदियों के बारे में नाज़िल हुई जो रसूलुल्लाह ﷺ के पास आकर ज़ाहिरी तौर पर ईमान का इज़हार करते थे, लेकिन अंदर से काफ़िर ही रहते थे। उनका यह ईमान लाना महज़ दिखावा था।

✅ [185] नेक सोहबत का फ़ायदा तभी है जब दिल साफ़ हो

इस आयत से यह समझ आता है कि रूहानी फ़ायदा उसी को होता है जिसका दिल सच्चा और मخلص हो। अगर कोई मुनाफ़िक़ नेक लोगों की महफ़िल में हो भी, तो जब तक उसका दिल पाक नहीं होगा, उसे कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा।
जैसे गंदगी से भरी बाल्टी कुएं के साफ़ पानी को गंदा कर देती है, उसी तरह मुनाफ़िक़ का अंदरूनी कुफ़्र उसे बाहरी सोहबत से भी बेनसीब कर देता है।

✅ [186] अल्लाह को हर छुपी बात का इल्म है

अल्लाह तआला उन सब नीतियों, इरादों और साज़िशों को जानता है जो ये लोग दिलों में छुपाए हुए हैं। इस आयत के ज़रिए रसूलुल्लाह ﷺ को तसल्ली दी गई कि अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों की चालों से पूरी तरह बाख़बर है और तुम्हारी हिफ़ाज़त करता है।

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