Transliteration: (Wa izaa jaaa'ookum qaalooo aamannaa wa qad dakhaloo bilkufri wa hum qad kharajoo bih; wallaahu a'lamu bimaa kaanoo yaktumoon)
यह आयत उन यहूदियों के बारे में नाज़िल हुई जो रसूलुल्लाह ﷺ के पास आकर ज़ाहिरी तौर पर ईमान का इज़हार करते थे, लेकिन अंदर से काफ़िर ही रहते थे। उनका यह ईमान लाना महज़ दिखावा था।
इस आयत से यह समझ आता है कि रूहानी फ़ायदा उसी को होता है जिसका दिल सच्चा और मخلص हो। अगर कोई मुनाफ़िक़ नेक लोगों की महफ़िल में हो भी, तो जब तक उसका दिल पाक नहीं होगा, उसे कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा।
जैसे गंदगी से भरी बाल्टी कुएं के साफ़ पानी को गंदा कर देती है, उसी तरह मुनाफ़िक़ का अंदरूनी कुफ़्र उसे बाहरी सोहबत से भी बेनसीब कर देता है।
अल्लाह तआला उन सब नीतियों, इरादों और साज़िशों को जानता है जो ये लोग दिलों में छुपाए हुए हैं। इस आयत के ज़रिए रसूलुल्लाह ﷺ को तसल्ली दी गई कि अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों की चालों से पूरी तरह बाख़बर है और तुम्हारी हिफ़ाज़त करता है।
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