कुरान - 5:74 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى ٱللَّهِ وَيَسۡتَغۡفِرُونَهُۥۚ وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Afalaa yatooboona ilal laahi wa yastaghfiroonah; wallaahu Ghafoorur Raheem)

(अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 74 की तफ़्सीर

✅ [221] अल्लाह की ओर रुजू और मग़फ़िरत तलब क्यों नहीं करते?

फिर वे अल्लाह की ओर क्यों नहीं पलटते और उससे क्षमा क्यों नहीं माँगते? [221] और अल्लाह बहुत क्षमाशील, अत्यंत दयालु है।

✅ [221] रुजू और मग़फ़िरत तलब करने का मतलब

इस आयत में रुजू (तौबा) का अर्थ है शिर्क और ग़लत अकीदों को छोड़कर अल्लाह की वहदानियत (तौहीद) को अपनाना। मग़फ़िरत तलब करने का मतलब है पिछले गुनाहों और ग़लत अकीदों पर सच्चे दिल से पछताना। इस तौबा के कई पहलू हैं:

  • त्रिमूर्ति (Trinity) जैसे गलत विश्वासों से मुंह मोड़ना
  • कुफ़्र और गुनाहों पर अफ़सोस ज़ाहिर करना
  • अल्लाह की वहदानियत पर स्थायी यक़ीन का इरादा करना

इसलिए यह आयत दोहराव नहीं, बल्कि तौबा की अहमियत और अल्लाह की माफ़ी और रहमत के वादे को उजागर करती है जो सच्चे दिल से तौबा करने वालों के लिए है।

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