कुरान - 5:77 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
قُلۡ يَـٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَا تَغۡلُواْ فِي دِينِكُمۡ غَيۡرَ ٱلۡحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوٓاْ أَهۡوَآءَ قَوۡمٖ قَدۡ ضَلُّواْ مِن قَبۡلُ وَأَضَلُّواْ كَثِيرٗا وَضَلُّواْ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ

Transliteration: (Qul yaaa Ahlal Kitaabi laa taghloo fee deenikum ghairal haqqi wa laa tattabi'ooo ahwaaa'a qawmin qad dalloo min qablu wa adalloo kaseeranw wa dalloo 'an Sawaaa'is Sabeel)

ऐ किताब वालो! अपने दीन में नाहक़ हद से न बढ़ो [225], और उन लोगों की ख्वाहिशों के पीछे न चलो जो पहले ही गुमराह हो चुके हैं, और कई लोगों को गुमराह कर चुके हैं, और ख़ुद भी सीधी राह से भटक गए हैं [226]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 77 की तफ़्सीर

✅ [225] दीन में हद से बढ़ने से मना

इस हुक्म का संबंध किताब वालों से है — उन्हें आगाह किया गया है कि वे अपने अक़ीदे और अमल में हद से आगे न जाएँ।

✅ [226] गुमराहों की ख्वाहिशों की पैरवी से बचो

ऐसे लोगों की ख्वाहिशों के पीछे न चलो जिन्होंने न सिर्फ ख़ुद राह खोई, बल्कि दूसरों को भी गुमराह किया, और सीधे रास्ते से भटक गए।

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