Transliteration: (Laisa 'alal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati junaahun feemaa ta'imooo izaa mat taqaw wa aamanoo wa 'amilus saalihaati summat taqaw wa aamanoo summat taqaw wa ahsanoo; wallaahu yuhibbul muhsineen)
यह आयत यह सिखाती है कि जब तक कोई ईश्वरीय आदेश नाज़िल न हो, तब तक के अमल पर गुनाह नहीं लिखा जाता। उदाहरण के लिए, वे नेक मोमिन, जिन्होंने शराब उसके हराम होने से पहले पी थी — वे गुनहगार नहीं माने गए। लेकिन तौहीद — यानी अल्लाह की एकता पर ईमान — हर हाल में अनिवार्य है, क्योंकि हर चीज़ उसकी वहदानियत की गवाही देती है, भले ही उन्हें शरई हुक्म न पहुँचा हो।
इस आयत में तक़वा (परहेज़गारी) का शब्द तीन बार आया है, और हर बार इसका अलग अर्थ है:
यह तीन-स्तरीय तक़वा व्यक्ति की रूहानी तरक़्क़ी को दर्शाता है, जो उसे अल्लाह की मुहब्बत तक ले जाता है — और अल्लाह मुहसिनीन (नेक कारगुज़ारों) से मुहब्बत करता है।
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