कुरान - 5:93 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

93
لَيۡسَ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ جُنَاحٞ فِيمَا طَعِمُوٓاْ إِذَا مَا ٱتَّقَواْ وَّءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ ثُمَّ ٱتَّقَواْ وَّءَامَنُواْ ثُمَّ ٱتَّقَواْ وَّأَحۡسَنُواْۚ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Laisa 'alal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati junaahun feemaa ta'imooo izaa mat taqaw wa aamanoo wa 'amilus saalihaati summat taqaw wa aamanoo summat taqaw wa ahsanoo; wallaahu yuhibbul muhsineen)

जो लोग ईमान लाए और अच्छे अमल किए, उनके लिए कोई गुनाह नहीं उसमें जो उन्होंने खाया, जब उन्होंने डर अपनाया [256], और ईमान लाए [257], और सद्काम किए। फिर वे डरते रहे, और ईमान पर क़ायम रहे, फिर और भी डरते रहे और अच्छे काम करते रहे। और अल्लाह नेक काम करने वालों को पसंद करता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 93 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 93 की तफ़्सीर

✅ [256] हुक्म उतरने से पहले के अमल पर कोई गुनाह नहीं

यह आयत यह सिखाती है कि जब तक कोई ईश्वरीय आदेश नाज़िल न हो, तब तक के अमल पर गुनाह नहीं लिखा जाता। उदाहरण के लिए, वे नेक मोमिन, जिन्होंने शराब उसके हराम होने से पहले पी थी — वे गुनहगार नहीं माने गए। लेकिन तौहीद — यानी अल्लाह की एकता पर ईमान — हर हाल में अनिवार्य है, क्योंकि हर चीज़ उसकी वहदानियत की गवाही देती है, भले ही उन्हें शरई हुक्म न पहुँचा हो।

✅ [257] परहेज़गारी (तक़वा) के तीन स्तर बताए गए

इस आयत में तक़वा (परहेज़गारी) का शब्द तीन बार आया है, और हर बार इसका अलग अर्थ है:

  1. झूठे अकीदों से बचना
  2. शराब और जुए से दूर रहना
  3. हर तरह के गुनाहों से बचना

यह तीन-स्तरीय तक़वा व्यक्ति की रूहानी तरक़्क़ी को दर्शाता है, जो उसे अल्लाह की मुहब्बत तक ले जाता है — और अल्लाह मुहसिनीन (नेक कारगुज़ारों) से मुहब्बत करता है।

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