कुरान - 5:96 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

96
أُحِلَّ لَكُمۡ صَيۡدُ ٱلۡبَحۡرِ وَطَعَامُهُۥ مَتَٰعٗا لَّكُمۡ وَلِلسَّيَّارَةِۖ وَحُرِّمَ عَلَيۡكُمۡ صَيۡدُ ٱلۡبَرِّ مَا دُمۡتُمۡ حُرُمٗاۗ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ ٱلَّذِيٓ إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ

Transliteration: (Uhilla lakum saidul bahri wa ta'aamuhoo mataa'al lakum wa lissaiyaarati wa hurrima 'alaikum saidul barri maa dumtum hurumaa; wattaqul laahal lazeee ilaihi tuhsharoon)

समुद्र का शिकार तुम्हारे लिए हलाल कर दिया गया है, और उसका खाना तुम्हारे लिए और मुसाफ़िरों के लिए जायज़ है [265]। और ज़मीनी शिकार तुम्हारे लिए हराम किया गया है, जब तक तुम एहराम की हालत में हो [266]। और अल्लाह से डरो, जिसकी ओर तुम्हें उठाया जाना है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 96 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 96 की तफ़्सीर

✅ [265] एहराम में समुद्री शिकार की इजाज़त

इस आयत में यह स्पष्ट किया गया है कि एहराम की हालत में रहते हुए भी समुद्री जीवों का शिकार करना — जैसे मछलियाँ पकड़ना या जाल डालना — जायज़ है। "समुद्र का शिकार" उन जानवरों को कहा गया है जो पानी में पैदा होते हैं, चाहे बाद में वे कहीं भी चले जाएं। इसके विपरीत, जो जानवर ज़मीन में पैदा होते हैं, उन्हें ज़मीनी शिकार ही माना जाएगा, भले ही वे पानी के पास रहें। इसलिए, समुद्री शिकार — हज या उमरा के दौरान भी — हलाल है।

✅ [266] ज़मीनी शिकार एहराम वालों और हरम में हराम

दो तरह का शिकार करना हराम है:

  1. एहराम की हालत में — जो भी व्यक्ति एहराम पहने हो।
  2. हरम की हद में — चाहे वह व्यक्ति एहराम में हो या न हो।

एहराम में ज़मीनी शिकार की मनाही उस समय तक रहती है जब तक एहराम की हालत जारी हो। लेकिन हरम की हुदूद के अंदर हर वक्त शिकार करना मना है — हर किसी के लिए। यहां तक कि इन जानवरों को हरम से बाहर ले जाना भी मना है, क्योंकि वे अल्लाह के संरक्षित क्षेत्र से संबंधित हैं।

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