Transliteration: (Uhilla lakum saidul bahri wa ta'aamuhoo mataa'al lakum wa lissaiyaarati wa hurrima 'alaikum saidul barri maa dumtum hurumaa; wattaqul laahal lazeee ilaihi tuhsharoon)
इस आयत में यह स्पष्ट किया गया है कि एहराम की हालत में रहते हुए भी समुद्री जीवों का शिकार करना — जैसे मछलियाँ पकड़ना या जाल डालना — जायज़ है। "समुद्र का शिकार" उन जानवरों को कहा गया है जो पानी में पैदा होते हैं, चाहे बाद में वे कहीं भी चले जाएं। इसके विपरीत, जो जानवर ज़मीन में पैदा होते हैं, उन्हें ज़मीनी शिकार ही माना जाएगा, भले ही वे पानी के पास रहें। इसलिए, समुद्री शिकार — हज या उमरा के दौरान भी — हलाल है।
दो तरह का शिकार करना हराम है:
एहराम में ज़मीनी शिकार की मनाही उस समय तक रहती है जब तक एहराम की हालत जारी हो। लेकिन हरम की हुदूद के अंदर हर वक्त शिकार करना मना है — हर किसी के लिए। यहां तक कि इन जानवरों को हरम से बाहर ले जाना भी मना है, क्योंकि वे अल्लाह के संरक्षित क्षेत्र से संबंधित हैं।
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