Transliteration: (I'lamooo annal laaha shadeedul 'iqaabi wa annal laaha Ghafoorur Raheem)
यह आयत इस बात की तज़्कीर कराती है कि जहाँ अल्लाह का अज़ाब बहुत सख़्त है, वहीं वह बेहद माफ़ करने वाला और मेहरबान भी है। एक सच्चे मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह के इंसाफ़ से डरे, लेकिन उसकी रहमत से उम्मीद भी रखे। खौफ़ और उम्मीद का यही संतुलन इंसान के ईमान को मज़बूत करता है और उसे सीधे रास्ते पर क़ायम रखता है।
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