कुरान - 5:99 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
مَّا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُۗ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تُبۡدُونَ وَمَا تَكۡتُمُونَ

Transliteration: (Maa 'alar Rasooli illal balaagh; wallaahu ya'lamu maa tubdoona wa maa taktumoon)

रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचा देना है [270]। और अल्लाह जानता है जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपाते हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 99 की तफ़्सीर

✅ [270] नबी का फ़र्ज़ पूरा हो चुका — अब ज़िम्मेदारी हमारी है

इस आयत में यह बताया गया है कि रसूल ﷺ का काम सिर्फ़ अल्लाह का संदेश साफ़-साफ़ पहुँचा देना था। अगर कोई व्यक्ति उसे न माने, तो रसूल को कोई नुक़सान नहीं, बल्कि ख़ुद उस इंकार करने वाले को ही नुक़सान होगा। जैसे कोई सूरज की रौशनी को न माने, तो उससे सूरज को कुछ नहीं होता — उसी तरह नबी का मिशन मुकम्मल है, और अब हर इंसान अपने अमल का खुद जवाबदेह है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now