Transliteration: (Maa 'alar Rasooli illal balaagh; wallaahu ya'lamu maa tubdoona wa maa taktumoon)
इस आयत में यह बताया गया है कि रसूल ﷺ का काम सिर्फ़ अल्लाह का संदेश साफ़-साफ़ पहुँचा देना था। अगर कोई व्यक्ति उसे न माने, तो रसूल को कोई नुक़सान नहीं, बल्कि ख़ुद उस इंकार करने वाले को ही नुक़सान होगा। जैसे कोई सूरज की रौशनी को न माने, तो उससे सूरज को कुछ नहीं होता — उसी तरह नबी का मिशन मुकम्मल है, और अब हर इंसान अपने अमल का खुद जवाबदेह है।
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