कुरान - 23:24 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
فَقَالَ ٱلۡمَلَؤُاْ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ مَا هَٰذَآ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُرِيدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيۡكُمۡ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَنزَلَ مَلَـٰٓئِكَةٗ مَّا سَمِعۡنَا بِهَٰذَا فِيٓ ءَابَآئِنَا ٱلۡأَوَّلِينَ

Transliteration: (Faqaalal mala'ul lazeena kafaroo min qawmihee maa haazaaa illaa basharum mislukum yureedu ai yatafaddala 'alaikum wa law shaaa'al laahu la anzala malaaa'ikatam maa sami'naa bihaazaa feee aabaaa'inal awwaleen)

24. तो उनकी क़ौम के काफ़िर सरदारों ने कहा, 'यह तो बस तुम्हारे ही जैसा एक इंसान है [34], जो तुम पर अपनी बड़ाई (हुकूमत) जताना चाहता है; और अगर अल्लाह चाहता तो ज़रूर फ़रिश्तों को उतारता [35]; हमने तो यह बात अपने अगले बाप-दादा के ज़माने में कभी नहीं सुनी [36]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 24 की तफ़सीर

"तो उनकी क़ौम के काफ़िर सरदारों ने कहा, 'यह तो बस तुम्हारे ही जैसा एक इंसान है [34], जो तुम पर अपनी बड़ाई (हुकूमत) जताना चाहता है; और अगर अल्लाह चाहता तो ज़रूर फ़रिश्तों को उतारता [35]; हमने तो यह बात अपने अगले बाप-दादा के ज़माने में कभी नहीं सुनी [36];"

[34] नबियों को अपने जैसा बशर कहना: काफ़िराना अक़ीदा

मुनकिरीन ने नबी की अज़मत और ख़ास मक़ाम का इनकार करते हुए कहा कि 'यह तो हमारे ही जैसा इंसान है।' नबियों की ज़ाहिरी बशरीयत को देखकर उनकी बातिनी इस्मत, नुबुव्वत और अज़ीम शान को नज़रअंदाज़ कर देना हमेशा से काफ़िरों और गुमराहों का तरीक़ा रहा है।

[35] अक़्ल का फ़साद: पत्थरों को पूजना मगर इंसान को नबी न मानना

काफ़िरों की अक़्ल का फ़साद देखिए कि वे बे-जान पत्थरों और मूर्तियों के सामने तो सजदा करते थे, मगर एक कामिल और मुक़द्दस इंसान को अल्लाह का रसूल मानने से इनकार करते थे और कहते थे कि रसूल फ़रिश्ता होना चाहिए था। जबकि इंसानों की हिदायत के लिए इंसानी रसूल ही सबसे मौज़ूं है ताकि वे उसकी सुन्नत पर अमल कर सकें।

[36] बाप-दादा की रस्मों की अंधी तक़लीद

हज़रत इदरीस और हज़रत नूह (अलैहिमुस्सलाम) के दरमियान एक लम्बा ज़माना गुज़र चुका था जिसमें लोग तौहीद भूलकर शिर्क में मुब्तला हो चुके थे। उन्होंने अपने बाप-दादा के ग़लत तरीक़ों को दलील बनाकर हक़ का इनकार कर दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now