कुरान - 23:25 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
إِنۡ هُوَ إِلَّا رَجُلُۢ بِهِۦ جِنَّةٞ فَتَرَبَّصُواْ بِهِۦ حَتَّىٰ حِينٖ

Transliteration: (In huwa illaa rajulum bihee jinnatun fatarabbasoo bihee hatta heen)

25. वह तो बस एक ऐसा आदमी है जिसे जुनून (पागलपन) हो गया है, पस तुम एक वक़्त तक उसका इंतज़ार कर लो [37] (कि वह मर जाए या ठीक हो जाए)।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 25 की तफ़सीर

"वह तो बस एक ऐसा आदमी है जिसे जुनून (पागलपन) हो गया है, पस तुम एक वक़्त तक उसका इंतज़ार कर लो [37] (कि वह मर जाए या ठीक हो जाए)।'"

[37] नबी पर तोहमत और बातिल का प्रोपेगैंडा

काफ़िर जब दलील के मैदान में हार गए, तो उन्होंने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) पर माआज़ल्लाह 'दीवानेपन' का इल्ज़ाम लगाया और लोगों से कहा कि कुछ दिन इंतज़ार करो, या तो यह खुद ठीक हो जाएंगे या मौत का शिकार हो जाएंगे। यह हर दौर के मुनकिरीने हक़ का शाइवा रहा है कि वे साहिबाने हक़ पर झूठी तोहमतें तराशते हैं।

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