कुरान - 23:26 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِي بِمَا كَذَّبُونِ

Transliteration: (Qaala Rabbin surnee bimaa kazzaboon)

26. (नूह ने) अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मेरी मदद फ़रमा इस बात पर कि उन्होंने मुझे झुठला दिया है [38] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 26 की तफ़सीर

"(नूह ने) अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मेरी मदद फ़रमा इस बात पर कि उन्होंने मुझे झुठला दिया है [38] ।'"

[38] हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की बारगाहे इलाही में फ़रियाद

साढ़े नौ सौ साल (950 वर्ष) तक दावत व तब्लीग़ के बावजूद जब क़ौम अपनी सरकशी पर अड़ी रही और अल्लाह ने वह्य के ज़रिये बता दिया कि अब कोई ईमान नहीं लाएगा, तो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह की बारगाह में मदद की दुआ फ़रमाई और उनकी हलाकत की बद्दुआ की। अम्बिया-ए-किराम का हर अमल अल्लाह के इज़्न और रज़ा के मुताबिक़ होता है।

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