Transliteration: (Wa qur Rabbi anzilnee munzalam mubaarakanw wa Anta khairul munzileen)
"और कहो, 'ऐ मेरे रब! मुझे बा-बरकत उतरना उतार [47], और तू ही सबसे बेहतर उतारने वाला (पनाह देने वाला) है!'"
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को तालीम दी गई कि कश्ती से उतरते वक़्त यह दुआ करें: 'रब्बि अनज़िल्नी मुनज़लन मुबारकतं व अन्ता ख़ैरुल मुनज़िलीन'। यह दुआ किसी भी सफ़र से उतरने, नए घर में दाख़िल होने या नई जगह क़ियाम करने के वक़्त पढ़ना बेहद मुबारक़ और हिफ़ाज़त का ज़रिया है।
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