कुरान - 23:30 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ وَإِن كُنَّا لَمُبۡتَلِينَ

Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayaatinw wa in kunnaa lamubtaleen)

30. बेशक इसमें बहुत सी निशानियां हैं [48], और बेशक हम तो बस आज़माइश करने वाले थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 30 की तफ़सीर

"बेशक इसमें बहुत सी निशानियां हैं [48], और बेशक हम तो बस आज़माइश करने वाले थे।"

[48] तूफ़ाने नूह में इब्रत के अज़ीम निशानात

इस वाक़िए में काफ़िरों और मोमिनों दोनों के लिए अज़ीम सबक़ हैं: काफ़िरों के लिए यह कि नबियों की मुख़ालफ़त का अंजाम दुनिया व आख़िरत में हलाकत है; और मोमिनों के लिए यह कि नबियों की पैरवी ही नजात की ज़ामिन है। नीज़ यह भी साबित हुआ कि नसब और ख़ानदान काम नहीं आता, सिर्फ़ ईमान और आमाल काम आते हैं।

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