कुरान - 23:34 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَلَئِنۡ أَطَعۡتُم بَشَرٗا مِّثۡلَكُمۡ إِنَّكُمۡ إِذٗا لَّخَٰسِرُونَ

Transliteration: (Wa la'in at'atum basharam mislakum innakum izal lakhaasiroon)

34. और अगर तुमने अपने ही जैसे एक इंसान की इताअत कर ली, तब तो तुम यक़ीनन बड़े घाटे (नुक़सान) में पड़ जाओगे [55]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 34 की तफ़सीर

"और अगर तुमने अपने ही जैसे एक इंसान की इताअत कर ली, तब तो तुम यक़ीनन बड़े घाटे (नुक़सान) में पड़ जाओगे [55];"

[55] काफ़िरों की उल्टी समझ

काफ़िरों की अक़्ल का दिवाला देखिए कि वे पत्थर के बे-जान बुतों की पूजा करने को अपनी इज़्ज़त समझते थे, मगर अल्लाह के बरगुज़ीदा नबी की पैरवी को अपने लिए घाटा और नुक़सान क़रार देते थे!

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