Transliteration: (Wa ja'alnab na Maryama wa ummahooo aayatannw wa aawainaahumaaa ilaa rabwatin zaati qaraarinw wa ma'een (section 3))
"और हमने मरयम के बेटे (ईसा) और उनकी वालिदा को एक अज़ीम निशानी बनाया [77], और हमने उन दोनों को एक बुलन्द ज़मीन (टीले) पर पनाह दी जो रहने के क़ाबिल और जारी चश्मे वाली थी [78] ।"
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश बग़ैर बाप के हज़रत मरयम (रज़ियल्लाहु अन्हा) के बत्न से हुई, जो अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत की निशानी है। क़ुरआन मजीद में हज़रत मरयम वाहिद ख़ातून हैं जिनका नाम सराहत के साथ बार-बार आया है।
यह बुलन्द मक़ाम मुल्क-ए-शाम में दमिश्क़ के पास 'नासराह' या बैतुल मक़दिस की बुलन्द सरज़मीन थी, जहाँ यहूदियों के शर से बचाकर अल्लाह ने हज़रत मरयम और उनके लख़्ते जिगर हज़रत ईसा (अलैहिमुस्सलाम) को पनाह दी। वहाँ साफ़-सुथरा पानी का चश्मा और लज़ीज़ फल मौजूद थे।
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