कुरान - 23:51 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلرُّسُلُ كُلُواْ مِنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ وَٱعۡمَلُواْ صَٰلِحًاۖ إِنِّي بِمَا تَعۡمَلُونَ عَلِيمٞ

Transliteration: (Yaaa aiyuhar Rusulu kuloo minat taiyibaati wa'maloo saalihan innee bimaa ta'maloona 'Aleem)

51. ऐ रसूलों! पाकीज़ा (हलाल) चीज़ें खाओ [79] और नेक आमाल करो [80]; बेशक तुम जो कुछ भी करते हो मैं उससे ख़ूब बाख़बर हूँ [81] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 51 की तफ़सीर

"ऐ रसूलों! पाकीज़ा (हलाल) चीज़ें खाओ [79] और नेक आमाल करो [80]; बेशक तुम जो कुछ भी करते हो मैं उससे ख़ूब बाख़बर हूँ [81] ।"

[79] तय्यिबात (हलाल व पाकीज़ा रिज़्क़) का हुक्म

अल्लाह तआला ने तमाम रसूलों को पाकीज़ा और हलाल रिज़्क़ खाने का हुक्म दिया। हलाल चीज़ों को खुद पर हराम कर लेना तक़वा नहीं है; असली तक़वा हराम से बचना और हलाल नेमतों को अल्लाह की फ़रमांबरदारी के साथ इस्तेमाल करना है।

[80] हलाल ग़िज़ा से नेक आमाल की तौफ़ीक़

हलाल लुक़्मा इंसान के दिल को रौशन करता है और नेक आमाल की तौफ़ीक़ बख़्शता है, जबकि हराम लुक़्मा इंसान से इबादत की लज़्ज़त छीन लेता है।

[81] इताअत व बन्दगी का हुक्म तमाम रसूलों के लिए

रसूलों को भी नेक आमाल का हुक्म देकर वाज़ेह फ़रमाया गया कि अल्लाह की बन्दगी और शरीअत की पाबंदी से कोई भी शख़्स बे-नियाज़ नहीं हो सकता।

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