कुरान - 23:52 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
وَإِنَّ هَٰذِهِۦٓ أُمَّتُكُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ وَأَنَا۠ رَبُّكُمۡ فَٱتَّقُونِ

Transliteration: (Wa inna haaziheee ummatukum ummatanw waahidatanw wa Ana Rabbukum fattaqoon)

52. और बेशक यह तुम्हारा दीन (उम्मत) एक ही दीन (उम्मत) है [82], और मैं ही तुम्हारा रब हूँ, पस मुझसे ही डरो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 52 की तफ़सीर

"और बेशक यह तुम्हारा दीन (उम्मत) एक ही दीन (उम्मत) है [82], और मैं ही तुम्हारा रब हूँ, पस मुझसे ही डरो।"

[82] तमाम अम्बिया का दीन एक: इस्लाम

तमाम नबियों का अस्ल दीन इस्लाम (तौहीद, रिसालत और आख़िरत पर ईमान) एक ही रहा है। शरीअतों के अहकाम अलग-अलग थे, मगर बुनियादी अक़ीदा सब का एक ही था। रब भी एक है, लिहाज़ा उसी की नाफ़रमानी से डरना लाज़िम है।

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