Transliteration: (Fazarhum fee ghamratihim hattaa heen)
"पस आप उन्हें उनकी ग़फ़लत (गुमराही) में एक ख़ास वक़्त तक छोड़ दीजिए [85] ।"
हुज़ूर अकरम ﷺ को तसल्ली दी गई कि आप इन मुआनदीन के पीछे अपना दिल न दुखाएं; इन्हें मौत या क़त्ले बद्र तक अपनी ग़फ़लत में पड़ा रहने दें। जब अज़ाब का वक़्त आएगा तो ये अपने अंजाम को पहुंच जाएंगे। इस्लाम में किसी को जबरन ईमान पर मजबूर नहीं किया जाता।
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