कुरान - 23:54 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
فَذَرۡهُمۡ فِي غَمۡرَتِهِمۡ حَتَّىٰ حِينٍ

Transliteration: (Fazarhum fee ghamratihim hattaa heen)

54. पस आप उन्हें उनकी ग़फ़लत (गुमराही) में एक ख़ास वक़्त तक छोड़ दीजिए [85] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 54 की तफ़सीर

"पस आप उन्हें उनकी ग़फ़लत (गुमराही) में एक ख़ास वक़्त तक छोड़ दीजिए [85] ।"

[85] मुनकिरीन को मुक़र्ररा मुद्दत तक मोहलत

हुज़ूर अकरम ﷺ को तसल्ली दी गई कि आप इन मुआनदीन के पीछे अपना दिल न दुखाएं; इन्हें मौत या क़त्ले बद्र तक अपनी ग़फ़लत में पड़ा रहने दें। जब अज़ाब का वक़्त आएगा तो ये अपने अंजाम को पहुंच जाएंगे। इस्लाम में किसी को जबरन ईमान पर मजबूर नहीं किया जाता।

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