कुरान - 23:56 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
نُسَارِعُ لَهُمۡ فِي ٱلۡخَيۡرَٰتِۚ بَل لَّا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Nusaari'u lahum fil khairaat; bal laa yash'uroon)

56. (तो क्या) हम उनके लिए भलाइयों में जल्दी कर रहे हैं? नहीं, बल्कि वे (अस्ल हक़ीक़त को) समझते नहीं हैं [87] ! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 56 की तफ़सीर

"(तो क्या) हम उनके लिए भलाइयों में जल्दी कर रहे हैं? नहीं, बल्कि वे (अस्ल हक़ीक़त को) समझते नहीं हैं [87] !"

[87] इस्तिदराज: ढील देकर पकड़ना

यह दुनियावी नेमतें उनके लिए कोई बख़्शिश नहीं बल्कि 'इस्तिदराज' (ढील) है ताकि वे गुनाहों में और आगे बढ़ जाएं और आख़िरत में उनकी पकड़ और सख़्त हो। वे इस रब्बानी हिकमत को नहीं समझते।

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