कुरान - 23:57 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
إِنَّ ٱلَّذِينَ هُم مِّنۡ خَشۡيَةِ رَبِّهِم مُّشۡفِقُونَ

Transliteration: (Innal lazeena hum min khashyati Rabbihim mushfiqoon)

57. बेशक जो लोग अपने रब के ख़ौफ़ व हैबत से कांपते रहने वाले हैं [88]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 57 की तफ़सीर

"बेशक जो लोग अपने रब के ख़ौफ़ व हैबत से कांपते रहने वाले हैं [88];"

[88] नेकी के बावजूद ख़ौफ़े ख़ुदा

सच्चे मोमिन नेक आमाल करने के बावजूद अल्लाह की अज़मत और जलाल से हर वक़्त कांपते रहते हैं। इंसान जितना अल्लाह के क़रीब होता है, उतना ही उसके दिल में ख़ौफ़े इलाही और अदब ज़्यादा होता है।

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