कुरान - 23:53 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
فَتَقَطَّعُوٓاْ أَمۡرَهُم بَيۡنَهُمۡ زُبُرٗاۖ كُلُّ حِزۡبِۭ بِمَا لَدَيۡهِمۡ فَرِحُونَ

Transliteration: (Fataqatta'ooo amrahum bainahum zuburaa; kullu hizbim bimaa ladaihim farihoon)

53. मगर लोगों ने अपने दीन को आपस में टुकड़े-टुकड़े (फ़िरक़ा-फ़िरक़ा) कर डाला [83]; हर गिरोह उसी पर इतरा रहा है जो उसके पास है [84] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 53 की तफ़सीर

"मगर लोगों ने अपने दीन को आपस में टुकड़े-टुकड़े (फ़िरक़ा-फ़िरक़ा) कर डाला [83]; हर गिरोह उसी पर इतरा रहा है जो उसके पास है [84] ।"

[83] दीनी तफ़र्रुक़ा और फ़िरक़ाबंदी की मज़म्मत

नबियों के बाद लोगों ने अपने नफ़्स की पैरवी करके दीन में नए-नए फ़िरक़े बना लिए और आपस में एक दूसरे को काफ़िर व गुमराह कहने लगे।

[84] बातिल अक़ाइद पर घमंड

हर गुमराह गिरोह अपने मनघड़ंत अक़ाइद और बिदआत को हक़ समझकर उसी पर ख़ुश हो रहा है और समझता है कि वही सीधे रास्ते पर है, हालांकि हक़ सिर्फ़ क़ुरआन व सुन्नत और जमाअते अहले हक़ के पास है।

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