Transliteration: (Wallazeena yu'toona maaa aataw wa quloobuhum wajilatun annahum ilaa Rabbihim raaji'oon)
"और जो (अल्लाह की राह में) जो कुछ भी देते हैं देते हैं, और उनके दिल इस बात से डरते रहते हैं [91] कि उन्हें अपने रब की तरफ़ लौटना है [92];"
हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने हुज़ूर ﷺ से पूछा कि 'क्या यह वे लोग हैं जो चोरी करते हैं या शराब पीते हैं और डरते हैं?' हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: 'नहीं ऐ सिद्दीक़ की बेटी! बल्कि यह वे लोग हैं जो नमाज़ पढ़ते हैं, रोज़ा रखते हैं, सदक़ा देते हैं, और फिर भी डरते हैं कि कहीं हमारा अमल बारगाहे इलाही में ना-मक़बूल न हो जाए!'
उन्हें यक़ीन है कि एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है, इसलिए वे अपनी नेकियों पर घमंड करने के बजाए आजिज़ी और ख़ौफ़ इख़्तियार करते हैं।
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