Transliteration: (Wa laa nukallifu nafsan illaa wus'ahaa wa ladainaa kitaabuny yantiqu bilhaqqi wa hum la yuzlamoon)
"और हम किसी जान पर उसकी ताक़त (गुंजाइश) से ज़्यादा बोझ नहीं डालते; और हमारे पास एक किताब है जो बिल्कुल सच-सच बोलती है [94], और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा [95] ।"
किताब से मुराद इंसान का नामा-ए-आमाल है जिसमें हर अमल दर्ज है। यह किताब क़ियामत के दिन ठीक-ठीक गवाही देगी ताकि हुज्जत तमाम हो जाए।
किसी पर उसके गुनाह से ज़्यादा अज़ाब नहीं होगा और किसी की नेकी का सवाब ज़रा बराबर भी ज़ाया नहीं किया जाएगा।
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