कुरान - 23:64 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
حَتَّىٰٓ إِذَآ أَخَذۡنَا مُتۡرَفِيهِم بِٱلۡعَذَابِ إِذَا هُمۡ يَجۡـَٔرُونَ

Transliteration: (Hattaaa izaaa akhaznaa mutrafeehim bil'azaabi izaa hum yaj'aroon)

64. यहाँ तक कि जब हम उनके ऐश-पसंद (मालदार) लोगों को अज़ाब में पकड़ लेंगे [98], तो अचानक वे चीख़-पुकार करने लगेंगे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 64 की तफ़सीर

"यहाँ तक कि जब हम उनके ऐश-पसंद (मालदार) लोगों को अज़ाब में पकड़ लेंगे [98], तो अचानक वे चीख़-पुकार करने लगेंगे;"

[98] मुतफ़र्रिहीन (ऐश-पसंद सरदारों) की पकड़

जब अज़ाब आएगा, तो सबसे पहले वे मालदार और मुतकब्बिर सरदार पकड़े जाएंगे जो दूसरों को गुमराह करते थे। उस वक़्त वे बे-बसी से चीख़ने-चिल्लाने लगेंगे मगर कोई मदद न पहुंचेगी।

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