कुरान - 23:66 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
قَدۡ كَانَتۡ ءَايَٰتِي تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَكُنتُمۡ عَلَىٰٓ أَعۡقَٰبِكُمۡ تَنكِصُونَ

Transliteration: (Qad kaanat Aayaatee tutlaa 'alaikum fakuntum 'alaaa a'qaabikum tankisoon)

66. यक़ीनन मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर सुनाई जाती थीं, तो तुम अपनी एड़ियों के बल उल्टे भागा करते थे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 66 की तफ़सीर

"यक़ीनन मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर सुनाई जाती थीं, तो तुम अपनी एड़ियों के बल उल्टे भागा करते थे;"

क़ुरआन से एअराज़ और तकब्बुर

दुनिया में जब हुज़ूर ﷺ तुम्हें क़ुरआन सुनाते थे, तो तुम हक़ सुनने के बजाए नफ़रत से मुंह फेर कर उल्टे पांव भागते थे। आज उसी सरकशी की सज़ा भुगतो।

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