कुरान - 23:67 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
مُسۡتَكۡبِرِينَ بِهِۦ سَٰمِرٗا تَهۡجُرُونَ

Transliteration: (Mustakbireena bihee saamiran tahjuroon)

67. हरम (काबे) पर घमंड करते हुए, रात की महफ़िलों में बेहूदा बकवास करते हुए मुंह फेर लेते थे [100] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 67 की तफ़सीर

"हरम (काबे) पर घमंड करते हुए, रात की महफ़िलों में बेहूदा बकवास करते हुए मुंह फेर लेते थे [100] ।'"

[100] हरम पर झूठा फ़ख़्र और रात की लग़्व महफ़िलें

क़ुरैश काबा के मुतवल्ली होने पर घमंड करते थे और रात को महफ़िलें जमाकर क़ुरआन और नबी करीम ﷺ के ख़िलाफ़ बेहूदा बातें और मज़ाक़ उड़ाते थे। मुक़द्दस जगह से निस्बत उस वक़्त तक कोई फ़ायदा नहीं देती जब तक दिल में सच्चा ईमान और अदब न हो।

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